क्या गेहूं खाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है?

 क्या गेहूं खाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है? 

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दुनिया के कई देशों में तथा उत्तर भारत में गेहूं प्रमुख धान्य के तौर पर घर घर में इस्तमाल किया जाता है । इसके अलावा ब्रेड बिस्कुट नूडल पास्ता पिज़्ज़ा बर्गर समोसा कचोरी सैंडविच तथा पैकेज्ड फूड्स में गेहूं/मैदा बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। गेहूं के बगैर खाने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन हम में से कुछ लोग ऐसे है जिन्हें गेहूं मैदा खाने से कई पेटसंबंधी समस्याएं होती है। कई बार तो यह समस्या गेहूं के कारण है यह बात समझ में ही नहीं आती है। जिससे इस अनजान बीमारी के लक्षण बढ़ते जाते है। सेहत बिगड़ती जाती है और  कई बार गंभीर रूप धारण कर लेती है।

आजकल पेट की तकलीफ, बार-बार दस्त, थकान और वजन न बढ़ने की शिकायत आम हो गई है। क्या आप जानते हैं कि इसका कारण गेहूं भी हो सकता है? इंटरनेट पर इस विषय पर बहुत जानकारी उपलब्ध है लेकिन समाज के हर सामान्य व्यक्ति तक यह जानकारी पहुंचे और लोग जागरूक हो जाए तो इस समस्या से उभरकर फिरसे अपनी सेहत पा सकते है।


सीलिएक रोग क्या है?


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सीलिएक रोग एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें ग्लूटेन नाम का प्रोटीन (जो गेहूं, जौ और राई में पाया जाता है) खाने पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत की अंदरूनी परत पर हमला कर देती है। ग्लूटेन की सबसे खतरनाक चीज 'ग्लियाडिन' है। इससे आंत की छोटी-छोटी उंगलियों जैसी परत (विली) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। नतीजा? शरीर भोजन से जरूरी पोषक तत्व जैसे आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी और फोलेट नहीं सोख पाता। थकान कमजोर आती है, मांसपेशियां, वजन घटने लगता है।


यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों में पेट फूलना, उल्टी और विकास रुकना, जबकि बड़े लोगों में थकान, एनीमिया, हड्डियां कमजोर होना और कभी-कभी कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी ऑटो इम्युन होने के कारण स्थायी है जीवनभर तकलीफ देती है। इसका कोई मेडिकल इलाज नहीं है।


लक्षण कैसे पहचानें?


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- पेट में दर्द, सूजन या गैस

- बार-बार दस्त या कब्ज

- भूख न लगना, वजन घटना

- थकान, चिड़चिड़ापन

- एनीमिया (खून की कमी)

- बच्चों में विकास धीमा होना

-  हड्डियों की कमजोरी / फ्रेक्चर 


कई बार लक्षण हल्के होते हैं, हम इनको नजर अंदाज कर देते है। लेकिन अगर ऐसे लक्षण बहुत लंबे समय के लिए चलते रहते है, तो डॉ की सलाह लेना ही उचित हैं। इसलिए डॉक्टर से ब्लड टेस्ट और आंत की बायोप्सी करवाकर ही पक्का पता चलता है।


ग्लूटेन फ्री डाइट: सीलिएक रोग का एकमात्र इलाज आजीवन ग्लूटेन फ्री डाइट है। गेहूं, जौ, राई, मैदा, सूजी, ब्रेड, रोटी, नूडल्स, पास्ता, समोसा, पिज्जा – सब छोड़ना पड़ता है। लेकिन चिंता मत कीजिए! आसान और स्वादिष्ट ग्लूटेन फ्री रेसिपीज इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। जिन्हें आप ट्राई कर सकते हैं। 

ग्लूटेन फ्री डाइट आपकी आंत को होने वाले नुकसान से बचाता है। इससे शरीर पोषक तत्व सोख सकता है। शरीर के सही पोषण से एनीमिया दूर होता है मांसपेशियां और वजन बढ़ाने में मदद होती है इसीलिए सीलिएक रोग के लक्षण दूर होने में मदद होती है।  आप भी साधारण व्यक्ति की तरह चुस्त तंदुरुस्त रह सकते हैं।


क्या खाएं?

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- चावल, बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का

- दालें, सब्जियां, फल

- बेसन (चना आटा), मूंग दाल का आटा

- दही, छाछ, मट्ठा


उदाहरण: पालक-बेसन का चीला, मूंग दाल का डोसा या रागी की रोटी। ग्लूटेन फ्री खाना भी स्वादिष्ट और पौष्टिक हो सकता है। इससे आंत धीरे-धीरे ठीक होती है, लक्षण कम होते हैं और पोषक तत्वों की कमी भी दूर होती है। पैकेज्ड फूड एटम्स खाने के लिए खरीदनेसे पहले लेबल पढ़ना सीखें – “ग्लूटेन फ्री” लिखा हो तो ही खाएं। अगर उसमें ग्लूटेन है तो दूसरा ऑप्शन चुने। आजकल पैकेज फूड आइटम्स में ग्लूटेन फ्री भी मिलता है। ऐसे फूड एटम्स को आगे भी उपयोग के लिए नोट करके रखे। लेकिन याद रखे हर बार ग्लूटेन फ्री लिखा हुआ चेक करे।


ग्लूटेन फ्री डाइट मुख्य इलाज है, लेकिन  लक्षणों को कम करने और शरीर को मजबूत बनाने में होमियोपैथी उपचार मदद कर सकती है। होमियोपैथी रोग का नाम नहीं देखती, बल्कि मरीज के पूरे लक्षण, स्वभाव और मूल कारण देखकर दवा चुनती है।


कुछ उपयोगी दवाएं (केवल योग्य होमियोपैथ डॉक्टर की सलाह पर और निगरानी में लेने के लिए):

- लाइकोपोडियम: पेट फूलने, गैस और अपच की शिकायत हो तो।

- आर्सेनिक एल्बम: दस्त, जलन और बेचैनी हो तो।

- नक्स वोमिका: भोजन के बाद अपच और चिड़चिड़ापन हो तो।

- सिलिसिया, नेट्रम म्यूर, कैल्केरिया फॉस: पोषण की कमी और कमजोरी दूर करने में मदद।

- कार्बो वेज, सल्फर, ब्रायोनिया: थकान, दस्त, हाथ पैर में दर्द आदि लक्षणों में कारगर।


होमियोपैथी आंत की सूजन कम करती है, पाचन सुधारती है और इम्यूनिटी बढ़ाती है। लेकिन याद रखें – यह डाइट का विकल्प नहीं, सहायक इलाज है। डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श जरूर लें।


जागरूकता ही बचाव है


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हम आम तौर पर सालोसे गेहूं खाते आ रहे है, लेकिन याद रहे, गेहूं हर किसी के लिए नहीं है। अगर आपको ऊपर बताए लक्षण हैं तो डॉक्टर से जांच कराएं। ग्लूटेन फ्री डाइट अपनाएं और स्वस्थ रहें। साथ ही होमियोपैथी की मदद से जीवन और भी आसान बन सकता है।


समाज में एक ही जैसी समस्या से जूझ रहे लोग ऐसी समस्या से आसानी से निपटने के लिए एक दूसरे की मदद कर सके इस दृष्टिकोण से एक सोसाइटी बना लेते हैं। जैसे कि आज कल की फेसबुक कम्युनिटीज !

सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों ने मिलकर एक दूसरे की मदद करने की भावना से सीलिएक सोसाइटी ऑफ इंडिया का गठन किया है। यह सोसाइटी इस रोग के बारे में आम जनता को जागरूक बनाने उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने ग्लूटेन फ्री खाना शहर के रेस्टोरेंट्स होटल में आसानी से उपलब्ध हो इस पर काम करती है इसके अलावा एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले सिलिया करोगी को ग्लूटेन फ्री फूड कहां आसानी से उपलब्ध है इस बारे में जानकारी देते रहती है। आजकल इंटरनेट की मदद से ग्लूटेन फ्री फूड ढूंढना और आसान हो गया है फिर भी सोसाइटी द्वारा किया गया कार्य सदा सराहनीय है। सीलिएक सोसाइटी ऑफ इंडियासे आप भी संपर्क कर उनकी मदद कर सकते है। जागरूक बनें, परिवार को बचाएं। याद रखें – “इलाज कारण में है, कारण को ठीक करे ”। सदा स्वस्थ रहें, खुश रहें!

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